जमानियां (गाजीपुर)। तहसील प्रशासन और अधिवक्ताओं के बीच चल रहा विवाद थमता नजर नहीं आ रहा है। अपनी विभिन्न मांगों को लेकर अधिवक्ताओं का अनिश्चितकालीन धरना शनिवार को दूसरे दिन भी जारी रहा। तहसील गेट के सामने बड़ी संख्या में जुटे अधिवक्ताओं ने प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की, जिससे तहसील का कार्य पूरी तरह प्रभावित रहा।
अधिवक्ताओं का कहना है कि 30 मार्च को हुई बार-बेंच बैठक में उठाई गई 19 सूत्रीय मांगों पर अब तक प्रशासन की ओर से कोई लिखित आश्वासन या कार्रवाई नहीं की गई है। वहीं 13 अप्रैल को राष्ट्रपति को संबोधित ज्ञापन सौंपने के दौरान उपजिलाधिकारी द्वारा कथित अमर्यादित व्यवहार किए जाने का भी आरोप लगाया गया। धरने के दौरान अधिवक्ताओं ने मांग उठाई कि तहसील के न्यायालयों एवं कार्यालयों में नियमों के विपरीत कार्यरत प्राइवेट कर्मियों को तत्काल हटाया जाए। साथ ही तहसीलदार द्वारा कथित रूप से समय से पूर्व कोर्ट बैठाकर पारित किए गए आदेशों को निरस्त करने तथा वरिष्ठ अधिवक्ताओं के लंबित प्रकरणों के शीघ्र निस्तारण की मांग भी प्रमुखता से उठाई गई।
बार एसोसिएशन के अध्यक्ष और सचिव ने संयुक्त रूप से कहा कि यह संघर्ष केवल अधिवक्ताओं का नहीं, बल्कि उन आम वादकारियों का भी है, जो तहसील में व्याप्त अव्यवस्था और भ्रष्टाचार के कारण न्याय के लिए परेशान हैं। अधिवक्ताओं ने चेतावनी दी कि जब तक उनकी सात सूत्रीय नई मांगों पर लिखित सहमति नहीं बनती, तब तक प्रतिदिन सुबह 11 बजे से दोपहर 2 बजे तक शांतिपूर्ण धरना जारी रहेगा। धरने में अध्यक्ष जयप्रकाश राम, सचिव मुनेश सिंह कुशवाहा सहित अशोक यादव, कमलकांत राय, अरविंद राय, रामरतन जायसवाल, संजय दुबे, शशि भूषण राय, बृजेश कुशवाहा, घनश्याम कुशवाहा, संजय यादव, रमेश यादव, अरुण कुमार, उदय नारायण सिंह, मेराज हसन, फैसल होदा, मिथिलेश सिंह, पंकज तिवारी, दिग्विजय नाथ तिवारी, राजेश गुप्ता, सुनील कुमार और रवि प्रकाश समेत बड़ी संख्या में अधिवक्ता मौजूद रहे।