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हिन्दी पत्रकारिता दिवस पर पत्रकारों ने किया मंथन, चुनौतियों और जिम्मेदारियों पर हुई चर्चा

ब्यूरो 31-05-2026

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गाजीपुर। हिन्दी पत्रकारिता दिवस के अवसर पर गाजीपुर पत्रकार एसोसिएशन द्वारा एक विचार गोष्ठी का आयोजन किया गया, जिसमें पत्रकारिता के इतिहास, वर्तमान चुनौतियों और सामाजिक दायित्वों पर विस्तार से चर्चा की गई। कार्यक्रम में जिले के वरिष्ठ पत्रकारों एवं बुद्धिजीवियों ने अपने विचार साझा किए।

गोष्ठी को संबोधित करते हुए वरिष्ठ पत्रकार अनिल उपाध्याय ने कहा कि वर्ष 1826 में प्रकाशित उदन्त मार्तण्ड हिन्दी भाषा का पहला समाचार पत्र था, जिसने हिन्दी पत्रकारिता की नींव रखी। उन्होंने कहा कि पत्रकारिता समय के साथ निरंतर विकसित हुई है और आज समाज के हर वर्ग तक अपनी पहुंच बना चुकी है। डॉ. ए.के. राय ने कहा कि पिछले दो शताब्दियों में हिन्दी पत्रकारिता ने अनेक बदलाव देखे हैं। आज पत्रकारिता का दायरा पहले से कहीं अधिक व्यापक हो गया है। तमाम चुनौतियों और दबावों के बावजूद पत्रकार समाज की समस्याओं को मुखरता से उठाकर जनहित में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। उन्होंने पत्रकारों की सुरक्षा और सम्मान सुनिश्चित करने की आवश्यकता पर भी बल दिया। एसोसिएशन के संरक्षक अशोक श्रीवास्तव ने कहा कि एक समय ऐसा था जब लोगों की सुबह अखबार पढ़कर होती थी और समाचार पत्रों में प्रकाशित खबरों पर शासन-प्रशासन तत्काल संज्ञान लेकर कार्रवाई करता था। पत्रकारिता आज भी समाज को दिशा देने का महत्वपूर्ण माध्यम बनी हुई है।

गोष्ठी की अध्यक्षता कर रहे सूर्यवीर सिंह ने कहा कि वर्तमान समय पत्रकारिता के लिए चुनौतीपूर्ण दौर है। सोशल मीडिया के तेजी से बढ़ते प्रभाव के बीच पत्रकारों को तथ्यों की पुष्टि और निष्पक्षता के प्रति अधिक सजग रहने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि हिन्दी पत्रकारिता दिवस केवल उत्सव का अवसर नहीं, बल्कि आत्ममंथन का भी दिन है। कार्यक्रम में सुशील उपाध्याय, रविकांत पाण्डेय, देवव्रत विश्वकर्मा, आलोक त्रिपाठी, दुर्गविजय सिंह, चंद्रकुमार तिवारी, विनोद कुमार गुप्ता, संजय सिंह, अजयशंकर तिवारी, प्रमोद कुमार सिन्हा, मुमताज अहमद, अरुण कुमार गुप्ता, उमेश श्रीवास्तव, भुवन जायसवाल, अवधेश सिंह यादव, सुमंत सिंह सिकरवार, इंद्रासन यादव, राजेश सिंह, अनिलाभ सिंह, रमेश सोनी सहित बड़ी संख्या में पत्रकार उपस्थित रहे। कार्यक्रम का संचालन आशुतोष त्रिपाठी ने किया, जबकि अध्यक्षता सूर्यवीर सिंह ने की। गोष्ठी के दौरान हिन्दी पत्रकारिता के गौरवशाली इतिहास को याद करते हुए लोकतंत्र में उसकी भूमिका पर भी प्रकाश डाला गया।

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