जमानिया (गाजीपुर)। तहसील स्थित उपनिबंधक कार्यालयों के निजीकरण के प्रस्ताव के विरोध में सोमवार को अधिवक्ताओं, वसीका नवीसों, स्टाम्प वेंडरों एवं दस्तावेज लेखकों ने कड़ा विरोध जताया। बार एसोसिएशन के अध्यक्ष जयप्रकाश राम की अध्यक्षता में आयोजित संयुक्त बैठक में सरकार के इस निर्णय की निंदा करते हुए इसे अधिवक्ता समाज और संबंधित व्यवसायों के लिए गंभीर संकट बताया गया।
बैठक में वक्ताओं ने कहा कि उपनिबंधक कार्यालयों के निजीकरण से अधिवक्ताओं, वसीका नवीसों, स्टाम्प वेंडरों तथा दस्तावेज लेखकों की आजीविका पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा। साथ ही आम जनता को भी विभिन्न प्रकार की प्रशासनिक एवं आर्थिक परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है। बैठक के उपरांत बार एसोसिएशन के महासचिव मुनेश सिंह कुशवाहा के नेतृत्व में एक प्रतिनिधिमंडल ने महामहिम राज्यपाल तथा प्रदेश के स्टाम्प एवं पंजीयन मंत्री रविन्द्र जायसवाल को संबोधित दो अलग-अलग ज्ञापन उपजिलाधिकारी एवं उपनिबंधक कार्यालय के माध्यम से प्रेषित किए।ज्ञापन में अधिवक्ताओं ने सात सूत्रीय मांगें रखते हुए प्रदेश के सभी उपनिबंधक कार्यालयों के निजीकरण पर तत्काल रोक लगाने की मांग की। इसके अतिरिक्त नवोदित अधिवक्ताओं को पांच वर्ष तक प्रतिमाह पांच हजार रुपये भत्ता देने, सभी जनपदों एवं तहसीलों में ई-लाइब्रेरी स्थापित करने तथा न्यायालय परिसरों में सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने के लिए सीसीटीवी कैमरे लगवाने की मांग की गई। अधिवक्ताओं ने वृद्ध अधिवक्ताओं के लिए पेंशन योजना लागू करने, अधिवक्ताओं, वसीका नवीसों एवं स्टाम्प वेंडरों को आयुष्मान कार्ड उपलब्ध कराने तथा आत्मरक्षा के लिए शस्त्र लाइसेंस जारी करने की मांग भी उठाई।
बार एसोसिएशन ने चेतावनी दी कि यदि उनकी मांगों पर शीघ्र सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया तो आंदोलन को और व्यापक रूप दिया जाएगा। प्रतिनिधिमंडल ने अपना मांग पत्र उपजिलाधिकारी मनोज कुमार पाठक को सौंपा। इस अवसर पर अध्यक्ष जयप्रकाश राम, महासचिव मुनेश सिंह कुशवाहा, पूर्व अध्यक्ष अशोक यादव, पूर्व मंत्री अमरनाथ राम, कमलकांत राय, पंकज तिवारी, नरेंद्र राय, फैसल होदा, मेराज हसन, उदय नारायण सिंह, बृजेश कुशवाहा, रमेश यादव, घनश्याम कुशवाहा, संजय यादव, धनंजय कुमार सिंह, अरुण कुमार, मिथिलेश सिंह, दिग्विजय नाथ तिवारी, राजेश गुप्ता, सुनील कुमार, रवि प्रकाश, सच्चिदानंद यादव, सुनील यादव, अक्षय कुमार सहित बड़ी संख्या में अधिवक्ता उपस्थित रहे।