गाजीपुर। जनपद के परिषदीय विद्यालयों में बच्चों के पठन कौशल को मजबूत और प्रभावी बनाने के लिए प्रतिदिन एक कालांश पुस्तकालय की पुस्तकों के पठन के लिए निर्धारित किया जाएगा। जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी ने बताया कि इस पहल का उद्देश्य बच्चों में पढ़ने की आदत विकसित करने के साथ भाषा संबंधी दक्षता, समझ के साथ पढ़ने तथा अभिव्यक्ति कौशल का विकास करना है।
इस व्यवस्था के तहत विद्यार्थी विद्यालय के पुस्तकालय में उपलब्ध अपनी आयु एवं कक्षा-स्तर के अनुरूप पुस्तकों का नियमित पठन करेंगे। शिक्षक बच्चों की रुचि और पठन स्तर के अनुसार पुस्तकों के चयन में सहयोग करेंगे। पुस्तक पढ़ने के बाद कहानी, पात्रों, घटनाओं और मुख्य विचारों पर बच्चों के साथ चर्चा भी कराई जाएगी। प्रतिदिन के पठन अभ्यास के माध्यम से बच्चों में शब्द भंडार, उच्चारण, प्रवाह के साथ पढ़ने, पढ़कर समझने, प्रश्नों के उत्तर देने तथा अपने विचारों को मौखिक एवं लिखित रूप में व्यक्त करने की क्षमता विकसित करने पर जोर दिया जाएगा। बच्चों को अपनी पसंद की पुस्तक चुनकर स्वतंत्र रूप से पढ़ने का अवसर भी मिलेगा। विद्यालयों में पुस्तक पठन को रोचक बनाने के लिए कहानी-कथन, पुस्तक चर्चा, चित्र देखकर कहानी बनाना, नए शब्दों का प्रयोग, पुस्तक समीक्षा तथा सहपाठियों के साथ विचार साझा करने जैसी गतिविधियां भी कराई जाएंगी। इससे बच्चों में पढ़ने के प्रति रुचि और आत्मविश्वास बढ़ाने के साथ विद्यालयों में पठन की संस्कृति विकसित करने में मदद मिलेगी।
जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी ने बताया कि निपुण भारत मिशन की भावना के अनुरूप यह पहल बच्चों को बुनियादी भाषा कौशल और संख्यात्मक समझ में दक्ष बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। नियमित पठन अभ्यास से बच्चों में ‘समझ के साथ पढ़ने’ की क्षमता विकसित होगी, जो उनके आगामी शैक्षिक अधिगम की मजबूत आधारशिला बनेगी। जनपद स्तर से विद्यालयों को निर्देशित किया गया है कि पुस्तकालय में उपलब्ध पुस्तकों का अधिकतम उपयोग सुनिश्चित करते हुए प्रतिदिन एक कालांश को प्रभावी पठन गतिविधियों के लिए उपयोग किया जाए। शिक्षक बच्चों के पठन स्तर में होने वाली प्रगति का निरंतर अनुश्रवण करते हुए आवश्यक सहयोग प्रदान करेंगे। इस पहल से जनपद के परिषदीय विद्यालयों में ‘हर दिन पढ़ें, समझें और सीखें’ की संस्कृति को बढ़ावा मिलेगा।